Friday, July 23rd, 2021

World Cycle Day 2021 Editorial : स्वस्थ जीवन स्वस्थ पर्यावरण के लिए सायकल एक अच्छा साथी

लोग अपने स्वास्थ्य और देश के बिगड़ते पर्यवरण के लिए अक्सर चिंतित रहते हैं । स्कूल से लेकर संसद तक इस मुद्दे पर बहस होती रहती है पर उस बहस का कोई नतीजा सामने आता है ऐसा नहीं लगता । बल्कि लोगों के स्वास्थ्य में गिरावट ही दर्ज होती है तो वहीं पर्यावरण के नाम पर केवल कागजी कार्रवाई कर लोग और राजनेता अपने कर्तव्य का इतिश्री कर लेते हैं । उल्टे जिस तरह दुनिया मे पेट्रोल डीजल वाहनों का उपयोग बढ़ रहा है वह पर्यावरण के लिए और भी चिंता का विषय बन गया है । गड़ियाँ के साइलेंसर से निकलने वाली धुआं धीरे धीरे हमारी जिंदगी को खत्म करते जा रहा है । हमे इसके विकल्प अथवा बचाव पर तत्काल मंथन करने की जरूरत है । आज 3 जून को विश्व सायकल दिवस मनाया जा रहा है । सायकल के महत्व को मनुष्य के जीवन मे बेहतर से बेहतर समझने समझाने और बेहतर उपयोग करने के लिए ही मनाया जाता है । संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 3 जून को वर्ल्ड सायकल डे मनाने की घोषणा की थो । 3 जून 2018 को आधिकारिक रूप से पहला सायकल दिवस मनाया गया । आज लोगों की व्यस्त लाइफ और मशीनरी जीवन मनुष्य को सायकल से दूर करते जा रहा है । आदमी आज घर से निकलता है तो कार , बाइक, स्कूटर या स्कूटी से ही निकलता है ।सायकल तो वक्त के साथ खत्म होती जा रही है । हम अपने छोटे बच्चों को भी सायकल से स्कूल भेजने के बजाय स्कूटी से भेज रहें हैं । बाइक स्कूटर गड़ियाँ लोन में इतनी आसानी से मिल जाती हैं कि गरीब से गरीब आदमी भी येनकेन प्रकारेण बाइक पर सवार होकर निकल रहा है । इसे विकास कहें या विनास कहें यह भी अब बड़ा सवाल है । यदि बाइक और सायकल की तुलनात्मक अध्ययन करें तो पता चलेगा सायकल को त्याग कर मनुष्य ने बहुत बड़ी गलती की है । सायकल चलाने से शरीर मे जो कसरत होती है वह इंसान के लिए बहुत फायदेमंद है । इससे पर्यावरण को भी नुकसान नही होता । वह शुद्ध वातावरण में रहता है । जबकि बाइक या डीजल पेट्रोल गाड़ी जो भी चलाएं सीधे स्वासथ्य पर असर करता है । पेट्रोल व डीजल का निकलने वाला धुआं वातावरण को दूषित करता है । मनुष्य के सांसों के माध्यम से जाकर मनुध्य को भी अनेक प्रकार बीमारियों से ग्रसित करता है । फायदा को देखते हुए हमको हमारे जीवन मो फिर से सायकल की दुनिया की ओर लौटना चहिये । लंबी दूरियां भले ही सायकल से न चली जाए पर छोटी मोटी 2 -4 किलोमीटर तक कि यात्रा हमेशा सायकल से करना चाहिए । घर से दफ्तर सुर दफ्तर से घर तो कम से कम ससिकल से करें तो सेहत ठीक भी रहेगा । बाइक कार को केवल शान शौकत के लिए ही इस्तेमाल न किया जाए बल्कि उसका उपयोग अपने घर के किसी जरूरी कामों के समय ही उपयोग किया जाए । बाकी समय सायकल तो चलाया जा सकता है । यह अजीब बात है लोगों को आजकल सायकल चलाने में शर्म महसूस होती है । यह निकृष्ट कोटि का विचार त्याग देना चाहिए । खान हैं रायपुर के पूर्व महापौर प्रमोद दुबे जी । वे जब महापौर थे तब माह में एक या दो दिन सायकल दिवस मनाते थे और लोगों को सायकल चलाने प्रेरित किया करते थे । लेकिन अब जब सभापति हैं यह सब कुछ भूल गए हैं । अब तो प्रमोद दुबे की सरकार है वो चाहते तो आज 3 जून को सायकल डे पर अनेक प्रेरणादायक काम कर सायकल चलाने अपील कर सकते थे । पर जबआज जब ससिकल दिवस है सब लापता हैं । लोककल्याणकारी काम अक्सर कम दिनों के लिए ही मस्तिष्क में ठहर पाता है । दुनिया के चिकित्सकों वैज्ञानिकों ने माना है सायकल चलाना स्वस्थ जीवन व स्वस्थ पर्यावरण के लिए सहायक है उसे हर किसी को अपनाना चाहिए । दरअसल सायकल से लोग अब ज्यादा परहेज करने लगे हैं । उसके मूल कारण को अगर जानने की जिज्ञासा रखते हैं तो यह बात स्पष्ट समझ आती है कि लोगो के जीवन में अब व्यस्तता बढ़ गई है । उनके पास इतना बिल्कुल समय नहीं है कि वह स्कूल दफ्तर जाने आने के लिए तो कम से कम सायकल का उपयोग कर सकें । तो एक बड़े बदलाव की जरूरत है व्यस्त जीवन के बीच भी अपनी सेहत को दुरुस्त रखने सायकल के विकल्प पर जाना चाहिए । सात दिन न सही तो तीन दिन दफ्तर सायकल से जाएं । सायकल से जो कसरत शरीर में होती है वह योग से भी ज्यादा फायदेमंद है । क्योंकि योग तो एक मजबूरी का कसरत होता है जिसे हम अपने जीवन से भय खा कर करते हैं जबकि सायकल जीवन को आगे बढ़ाने का कसरत होता है । यह मजबूरी में नही बल्कि जीवन की जरूरत में अपनाई गई होती है । इसलिए दोस्त पूरा न सही तो जितना आप चला सकते हैं सायकल चलाइये । यह नुकसान नही फायदा ही देगा ।

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