Friday, June 25th, 2021

WTC Final: वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में क्यों हनुमा विहारी पर टिकी हैं विराट और शास्त्री की निगाहें?

WTC Final: वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में क्यों हनुमा विहारी पर टिकी हैं विराट और शास्त्री की निगाहें?

WTC Final: हनुमा विहारी भारत के लिए सिर्फ टेस्ट खेलते हैं. उन्होंने अभी तक 12 टेस्ट मैच खेले हैं और एक शतक, चार अर्धशतकों की मदद से 624 रन बनाए हैं.

वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल (ICC World Test Championship Final) में मैदान पर उतरने वाले एक-एक खिलाड़ी का रोल बहुत अहम है.

विराट कोहली (Virat Kohli) के पास बतौर कप्तान और रवि शास्त्री (Ravi Shastri) के पास बतौर कोच आईसीसी वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतने का ये बड़ा मौका है. टीम इंडिया (Team India) ने फाइनल तक का सफर शानदार तरीके से तय भी किया है.

अब एक आखिरी लड़ाई 18 जून से साउथैंप्टन (Southampton) में लड़ी जानी है. इस मैच के लिए भारतीय टीम की हर रणनीति पर हम लगातार बात कर रहे हैं.

आज बात करते हैं एक ऐसे बल्लेबाज की जिस पर गेंद की चमक को कम करने की जिम्मेदारी होगी. वो भी पहली नहीं बल्कि दूसरी गेंद की. अगर भारतीय टीम के टॉप और मिडिल ऑर्डर बल्लेबाजों ने मैच को इस मोड़ तक पहुंचा दिया तो समझिए भारत का पलड़ा हर हाल में भारी होगा.

इस बात को आसान तरीके से समझिए. टेस्ट क्रिकेट में विरोधी टीम 80 ओवर के बाद नई गेंद ले सकती है. नई गेंद से उसके गेंदबाज एक बार फिर नए जोश के साथ हमला बोलते हैं. इसीलिए टेस्ट क्रिकेट में छठे-सातवें नंबर पर एक ऐसा बल्लेबाज रखा जाता है

जो तकनीकी तौर पर इतना दक्ष हो कि गेंदबाजों का हमला झेल सके. भारतीय टीम मे वेरी वेरी स्पेशल लक्ष्मण ने ये जिम्मेदारी लंबे समय तक निभाई है. अब यही रोल हनुमा विहारी (Hanuma Vihari) का है.

बशर्ते उनसे पहले के बल्लेबाज 80 ओवर बल्लेबाजी करें. और अगर हनुमा विहारी के क्रीज पर पहुंचने तक 80 ओवर भारतीय टीम खेल चुकी होगी तो उसके स्कोरबोर्ड पर आसानी से 300 रन होंगे. जो कीवियों पर दबाव बनाने के लिए काफी होंगे.

और इसी 300 रन को पुछल्ले बल्लेबाजों के साथ मिलकर 400 तक पहुंचाने की जिम्मेदारी हनुमा विहारी की होगी. जिसमें वो सक्षम भी हैं.

WTC Final: हनुमा विहारी की बल्लेबाजी का तकनीकी पक्ष

हनुमा विहारी बैकफुट पर बहुत मजबूत है. गेंद के पिच पर टप्पा खाने के बाद उसे अंत तक देखने के बाद ही वो शॉट खेलते हैं. सीधे बल्ले से खेलने में उन्हें महारत हासिल है. 2019 में जब उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ शतक लगाया था,

तो उनकी पारी को याद कीजिए. उन्होंने जितने भी रन बनाए उसमें लगभग 70 फीसदी रन ऐसे थे जो उन्होंने सीधे बल्ले से बनाए. हनुमा विहारी की एक और खासियत है. वो अपनी बल्लेबाजी के दौरान किसी तरह का ‘रिस्क’ कम ही लेते हैं. इस मामले में तो कई बार ऐसा लगता है कि वो विराट कोहली से भी बेहतर हैं.

हनुमा विहारी को इस बात का अंदाजा अच्छी तरह है कि उन्हें अपनी बल्लेबाजी को कब रफ्तार देना है. यही वजह हैं कि फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनके खाते में 7000 से ज्यादा रन हैं, 21 शतक हैं. एक तिहरा शतक है.

कई बार ऐसा होता है कि खिलाड़ी अपने घरेलू प्रदर्शन को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नहीं दोहरा पाता है. लेकिन हनुमा विहारी को अब तक जब भी टेस्ट टीम में मौका मिला है उन्होंने ज्यादातर मौकों पर खुद को साबित किया है.

WTC Final: शुरूआती टेस्ट से ही जगाया था भरोसा

हनुमा विहारी की कहानी की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया (2018-19) से हुई थी. यूं तो उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट करियर की शुरूआत की थी. लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में उनकी बल्लेबाजी निखर कर आई.

मुश्किल हालात में भी उन्होंने धैर्य के साथ बल्लेबाजी की थी. ऑस्ट्रेलिया में विहारी के खाते में कोई बड़ी पारी नहीं थी लेकिन 3 टेस्ट मैच की 5 पारियों में हनुमा विहारी ने 111 रन बनाए थे.

उनकी औसत भले ही 22.20 की थी लेकिन उनकी बल्लेबाजी का अंदाज भरोसा देने वाला था. हर किसी को ये समझ आ चुका था कि ये खिलाड़ी आसानी से अपना विकेट किसी को देने वाला नहीं है.

पिछले ऑस्ट्रेलिया दौरे में हनुमा विहारी की साहसिक बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने सिडनी टेस्ट मैच ड्रॉ कराया था. आर अश्विन ने इसमें उनका बखूबी साथ दिया था. हनुमा विहारी ने चोट के बाद भी करीब चार घंटे तक क्रीज को संभाला.

161 गेंद का सामना किया. इसका फायदा ये हुआ कि ब्रिसबेन में चौथे टेस्ट मैच में भारतीय टीम 1-1 की स्कोरलाइन पर उतरी और उसके बाद ब्रिसबेन में टेस्ट मैच जीतकर उसने इतिहास रचा.

Leave a Reply

x
%d bloggers like this: